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आख़िरी मैसेज

यूँ तो रागिनी और रोहन के प्रेम विवाह को तीन साल से ज़्यादा वक़्त बीत चुका था लेकिन दोनों के परिवारों की उनसे नाराज़गी अभी भी उसी तरह कायम थी।ऐसा नहीं कि रागिनी और रोहन ने इस रिश्ते के लिये अपने परिवारों ...

आख़िरी मैसेज


यूँ तो रागिनी और रोहन के प्रेम विवाह को तीन साल से ज़्यादा वक़्त बीत चुका था लेकिन दोनों के परिवारों की उनसे नाराज़गी अभी भी उसी तरह कायम थी।ऐसा नहीं कि रागिनी और रोहन ने इस रिश्ते के लिये अपने परिवारों को मनाने की कोशिश नहीं की थी लेकिन वो उन्हें मनाने में जब कामयाब नहीं हुए तो दोनों ने सबकी मर्ज़ी के ख़िलाफ़ जा कर एक दूसरे के साथ ज़िन्दगी बिताने का फ़ैसला कर लिया।हालाँकि इसकी क़ीमत उन्हें अपने अपने परिवार से अलग होकर अदा करनी पड़ी।


परिवार का साथ और सहारा छूट जाने के बाद रोहन ने एक प्राइवेट कम्पनी में नौकरी कर ली और उसी की तरफ़ से मिले छोटे से मकान को अपना आशियाना बना लिया।जब उनकी ज़िंदगी में विपुल आया तो रिश्तों पर जमी बर्फ़ को थोड़ी गर्माहट मिलनी शुरू हुई। रागिनी के माता-पिता उनसे मिलने भी आये लेकिन रोहन के पिता तब भी उनसे दूर ही रहे हालाँकि रोहन की माँ और छोटे भाई बहन कभी-कभार छुप-छुपा के उनको फ़ोन कर लेते।


ज़िन्दगी इसी तरह आगे बढ़ती जा रही थी।कहते हैं कि जब इंसान के इम्तिहान की घड़ी आती है तो मुसीबतें अपनी राह बना ही लेती हैं।रोहन जिस कम्पनी में नौकरी करता था उसे व्यापार में बहुत घाटा उठाना पड़ा और कम्पनी ने कर्मचारियों की छंटनी का फ़ैसला किया।दुर्भाग्य से रोहन भी उन लोगों में शामिल था जिन्हें नौकरी से निकाला जाना था।अचानक नौकरी चली जाने की वजह से रोहन बहुत टूट गया था और चिन्ता की वजह से उसका व्यवहार भी चिड़चिड़ा हो गया था।इसका असर रोहन और रागिनी के रिश्ते पर भी दिखने लगा था।जब से रोहन की नौकरी गयी थी रोज़ ही उनकी किसी ना किसी बात को लेकर नोकझोंक हो जाती। जिन बातों को पहले वो नज़रंदाज़ कर दिया करते थे अब अक्सर उन बातों पर लंबी लंबी बहसें हो जाया करतीं। कई बार तो कड़वाहट इतनी बढ़ जाती की दोनों कई-कई दिन एक दूसरे से बात भी नहीं करते।दूसरी तरफ़ काफ़ी कोशिशों के बावजूद भी रोहन को कोई दूसरी जॉब नहीं मिल पा रही थी। एक रात रागिनी ने रोहन से कहा:-


"मैंने मम्मी को फ़ोन किया था।आपके बारे में बात की थी।मम्मी चाहती हैं आप एक बार घर आ के पापा से मिल लें।बनारस में पापा के एक दोस्त हैं।पापा ने उनसे आपकी जॉब की बात की है।"


-"रागिनी ! मैंने तुमसे कहा ना मुझे जो करना है अपने बलबूते करना है।नहीं चाहिये मुझे किसी भी रिश्तेदार की मदद।तुम्हें इन लोगों की हमदर्दी के पीछे छुपा उपहास दिखाई नहीं देता।" रोहन ने गुस्से में कहा तो


रागिनी भी बिफर पड़ी-


"तो कहाँ है तुम्हारा बलबूता।कितने दिनों से भटक रहे हो नौकरी के लिये।अब पापा मदद करना चाहते हैं तो तुम्हें इसमें भी अपना अपमान नज़र आ रहा।कितने दिनों के बाद तो सब नॉर्मल हो रहा है।पापा आये थे ना विपुल को देखने"


-"क्या नॉर्मल हो रहा है? तुम्हारे पापा आये थे विपुल को देखने तो ये भी एक एहसान चढ़ गया मेरे सर।इन्हीं पापा ने अतीत में तुम्हें 3 साल तक मुड़कर नहीं देखा और अब तुम्हें हमारा भविष्य उनमें नज़र आ रहा है।"


-"हाँ, तो क्या ग़लत कह दिया मैंने।उस वक़्त वो नाराज़ थे। कम से कम आज इस मुसीबत की घड़ी में वो हमारी मदद करने को तो आगे आ रहे हैं।तुम्हारे पापा ने तो झूठी हमदर्दी भी नहीं दिखायी।विपुल तक को देखने नहीं आए।"


-"तो अब तुम मुझे पापा का ताना दोगी।चढ़ गया तुम पर भी रंग।मायके से दो चार कॉल पर बात होते ही उनकी ज़ुबान बोलने लगी तुम। भूल गयी इन सब लोगों ने हमें बेसहारा छोड़ दिया था।आज मैं उन्हीं के सामने हाथ फैलाने जाऊँ।"


रोहन और रागिनी को यूँ झगड़ते देख 3 साल का नन्हा विपुल रोने लगा।रागिनी बड़बड़ाते हुए आगे बढ़ी-"बच्चे का भी खयाल नहीं इनको बस जब देखो लड़ने को तैयार रहते हैं।" और विपुल को गोद में उठा कर वो किचन में चली गयी। नन्हा विपुल रागिनी के कंधे पर सर टिकाए रोहन को टकटकी लगाकर देख रहा था।उसकी छोटी चमकदार आँखों में आँसू मोती की तरह चमक रहे थे। रोहन से ये देखा ना गया।उस रात किसी ने खाना नहीं खाया।अगली सुबह जब रागिनी जागी तो देखा कि रोहन, विपुल के साथ खेल रहा है।रागिनी के होंटों पर मुस्कुराहट की एक लहर उठी और वो उठकर उन दोनों के पास आ गयी।उसने रोहन के कंधे पर अपना हाथ रख दिया।ठीक 4 साल पहले इसी तरह उसने उदास रोहन के कंधे पर हाथ रख के कहा था-"कोई माने या ना माने मुझे तुम्हारे साथ ही ये ज़िन्दगी गुज़ारनी है।" आज जब दोबारा उसने रोहन के कंधे पर हाथ रक्खा तो रोहन ने उसे मुड़कर देखा और अपने क़रीब करते हुए कहा-"तुम दोनों की ख़ुशी के लिए मुझे जो भी करना पड़ेगा मैं करूँगा।मैं कल सुबह ही तुम्हारे पापा से मिल के बनारस के लिए निकलूँगा।"


रागिनी की आँखों से ख़ुशी छलक आयी और उसने विपुल को गोद में भरकर चूम लिया। अगली सुबह रागिनी की माँ और पापा खुद ही रोहन से मिलने उनके घर चले आए।आज पहली बार रोहन और रागिनी के पिता एक दूसरे से गले मिले। विपुल अपनी नानी के पैरों से लिपट गया। रागिनी को लगा जैसे खुशियाँ वापस उसके घर की राह ले रही हैं।


रागिनी के पिता वर्मा जी रोहन को अपने दोस्त का पता और मोबाइल नम्बर देकर वापस चले गए। रोहन बनारस जाने की तैयारी करने लगा।रागिनी उसके लिए चाय बनाकर लायी।चाय को मेज़ पर रख के वो रोहन की मदद करने लगी।


-"पापा कितने खुश थे ना रोहन"


-"हाँ अच्छी एक्टिंग कर रहे थे।मम्मी जी अच्छी डायरेक्टर मालूम होती हैं।"


-"तुम भी ना बिलकुल बाज़ नहीं आओगे" रागिनी ने रोहन पर शर्ट फेंकते हुए कहा।


-"अच्छा, ये तो बताओ बनारस से मेरे लिए क्या लाओगे।" रागिनी ने मासूमियत के साथ पूछा।


-"जो भी तुम चाहो।वैसे भी एक अरसे से तुम्हें, तुम्हारी पसन्द का कोई गिफ़्ट नहीं दे सका हूँ।"


-"पागल! ऐसी बातें नहीं करते।.........अच्छा, अब बनारस जा ही रहे हो तो मेरे लिए अपनी पसन्द की कोई बनारसी साड़ी लेते आना।"


-"जो हुक़्म मेरे आका।" रोहन ने रागिनी को छेड़ते हुए कहा।


उस पल में आँखों आँखों में जाने कितनी बातें हो गयीं। रोहन के जाने का वक़्त हो गया।विपुल और रागिनी दोनों को गले लगा के रोहन ने सफ़र के लिए अपने क़दम बढ़ाए।कुछ दूर चल के मुड़ के देखा तो रागिनी और विपुल उसे जाता देख रहे थे। रोहन मुस्कुरा दिया।विपुल देर तक हाथ हिलाता रहा।


रोहन बनारस पहुँच के वर्मा जी के दोस्त शराफ़त अली से मिला।दो दिन तक उन्होंने कई जगह नौकरी की बात की और आख़िर में एक जगह अच्छी सैलरी पर बात पक्की हो गयी।रोहन को एक हफ्ते बाद ज्वाइन करना था।रोहन, रागिनी और विपुल को लाने के लिए बनारस से वापस आ रहा था।शाम के 7 बजे की बस में बैठते ही उसने रागिनी को फ़ोन किया लेकिन बस में बहुत शोर होने की वजह से आवाज़ सुनाई नहीं दे रही थी तो उसने व्हाट्सएप्प पर रागिनी को मैसेज भेजा- "वापस आ रहा हूँ। नौकरी की बात पक्की हो गयी है। पापा के दोस्त बहुत ही अच्छे इंसान हैं।2 दिन तक अपना सारा काम छोड़ के मेरी जॉब के सिलसिले में मेरे साथ कई जगह जाते रहे।"


रागिनी बहुत खुश हुयी। उसने रोहन से पूछा-"फिर आपको कब से ज्वाइन करना होगा"


-"अगले हफ्ते से ज्वाइन करना है।"


-"I am so happy Rohan! ....अच्छा सुनो! मेरा गिफ्ट तो नहीं भूले ना।"


-"नहीं भूला। तुम्हारी फ़ेवरिट बनारसी साड़ी ले ली है।बहुत खूबसूरत है।पहनोगी तो दुल्हन की तरह खिल उठोगी।"


रागिनी ने रोहन को छेड़ने के लिए मैसेज लिखा-" मैं तो हमेशा से खिली-खिली थी।वो तो तुमसे शादी हो गयी तो मुरझा गयी।"


मैसेज रीड हो गया। कई सेकण्ड गुज़र गये लेकिन कोई जवाब नहीं आया तो रागिनी ने दूसरा मैसेज भेजा-" क्या हुआ। एंग्री मैन ! मज़ाक कर रही थी।बुरा मान गए।हुँह"


दूसरा मैसेज भी रीड हो गया लेकिन रोहन ने कोई जवाब नहीं दिया।


रागिनी ने तीसरा मैसेज भेजा-"सॉरी बाबा! सच में मज़ाक कर रही थी।ख़ुशी में ज़्यादा लिख गयी।माफ़ कर दो प्लीज़ चुप ना रहो वर्ना विपुल से शिकयत कर दूँगी।"


रोहन ने फिर मैसेज पढ़ लिया लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। रागिनी ने व्हाट्सएप्प बंद कर के रोहन को फ़ोन किया।बेल जाती रही।रोहन ने फोन नहीं उठाया।रागिनी ने बीसियों कॉल कर डाले लेकिन रोहन तो मानो बहुत ही ज़्यादा नाराज़ हो गया था।रागिनी को भी गुस्सा आ गया।उसने फ़ोन मेज़ पर पटक दिया और विपुल को गोद में उठा के कमरे में चली गयी।कब उसकी आँख लग गयी उसे पता ही नहीं चला। रात के लगभग 10 बजे फ़ोन की बेल बजी।बेल की आवाज़ से नन्हें विपुल की नींद खुल गयी।वो रोने लगा।रागिनी ने उसकी पीठ थपथपाई और खुद उठ के मेज़ की तरफ़ बढ़ी।विपुल बिस्तर से उतर के किनारे खड़ा हो गया।


रागिनी ने फ़ोन देखा-"रोहन कॉलिंग"


रागिनी का चेहरा गुस्से से लाल हो गया।उसने फ़ोन रिसीव किया और आपे से बाहर हो गयी-"यही आता है तुम्हें।एक ज़रा सा मज़ाक क्या कर दिया कि तुम इस तरह पेश आने लगे।अब क्या मैं कोई मज़ाक भी नहीं कर सकती।सॉरी भी तो कहा ना।कितने कॉल किए तुमको।एक बार रिसीव नहीं कर सकते थे।कहाँ मर गए थे.......।"


उधर से जिस आवाज़ ने ख़ामोशी को तोड़ा वो रोहन की नहीं थी।


"मैडम! मैं हाइवे से सब इंस्पेक्टर विक्रम बोल रहा हूँ। 2 घण्टे पहले यहाँ एक रो... रोड एक्सीडेंट में आ...आप...के हस.. हसबैंड की ड... डेथ हो गयी है।उनका सामान हमारे पास है तो...तो... आ.....आप..अभी रात को या कल ....कल सुबह......"


रागिनी के हाथ कांपते हैं।फ़ोन छूट कर ज़मीन पर गिर जाता है।विपुल आगे बढ़ के फ़ोन को उठा लेता है।उसके स्पर्श से व्हाट्सएप्प खुल जाता है।वो फ़ोन रागिनी की तरफ बढ़ाता है।रागिनी की ऊँगली रोहन के नाम से छूती है।उनकी चैट खुलकर सामने आ जाती है।रागिनी के तीन मैसेजेस के ऊपर रोहन का आख़िरी मैसेज है-


"तुम्हारी फ़ेवरिट बनारसी साड़ी ले ली है।बहुत खूबसूरत है।पहनोगी तो दुल्हन की तरह खिल उठोगी।"


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HOT COMMENTS

Kallua

very heart touching story

7 Months ago

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